प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले की प्राचीर से ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन’ (NCMM) की घोषणा की। इस मिशन का उद्देश्य भारत को दुर्लभ खनिजों में आत्मनिर्भर बनाना है, जो स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, और रक्षा उद्योगों के लिए आवश्यक हैं। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को मजबूती प्रदान करेगी।IMPRI Institute+1Jagran+2Samachar Wani News+2
नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन क्या है और इसके फायदे
नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन एक सात वर्षीय योजना है, जो 2024-25 से 2030-31 तक चलेगी। इसका उद्देश्य भारत में 24 महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना है। इस मिशन के तहत ₹34,300 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है, जिसमें से ₹16,300 करोड़ का आवंटन केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया है। इससे भारत की खनिज आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी। Lakshmi Sri+4IEA+4Press Information Bureau+4
भारत की क्रिटिकल मिनरल्स पर निर्भरता और समाधान
वर्तमान में, भारत को लिथियम, कोबाल्ट, निकल, और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ता है। यह निर्भरता वैश्विक आपूर्ति संकट और भू-राजनीतिक तनावों के कारण जोखिमपूर्ण है। NCMM के माध्यम से, भारत इन खनिजों की घरेलू खोज और उत्पादन को बढ़ावा देगा, जिससे आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
मेक इन इंडिया को मिलने वाला बूस्ट
NCMM भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे घरेलू उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी, विशेषकर सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियां, और रक्षा उपकरणों के निर्माण में। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मिशन को ‘मिशन मैन्युफैक्चरिंग’ के रूप में प्रस्तुत किया है, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को अग्रणी बनाएगा। The Times of India+7IMPRI Institute+7IEEFA+7Samachar Wani News
रियर अर्थ एलिमेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर प्रभाव
दुर्लभ पृथ्वी तत्व (REEs) जैसे लिथियम, नियोडिमियम, और समेरियम, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक हैं। भारत इन तत्वों के लिए चीन और अन्य देशों पर निर्भर है। NCMM के तहत, भारत इन तत्वों की घरेलू खोज और प्रसंस्करण को बढ़ावा देगा, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी। Samachar Wani News
खनन सेक्टर में नई नीतियों और सुधार
NCMM के तहत, खनन क्षेत्र में कई सुधार किए गए हैं। खनिजों की खोज, खनन, और प्रसंस्करण के लिए नई नीतियाँ बनाई गई हैं, जो निवेशकों के लिए आकर्षक होंगी। इसके अलावा, खनन से संबंधित पर्यावरणीय नियमों में भी संशोधन किए गए हैं, ताकि स्थायी विकास सुनिश्चित हो सके। ETCFO.com
आत्मनिर्भर भारत में क्रिटिकल मिनरल्स की भूमिका
क्रिटिकल मिनरल्स आत्मनिर्भर भारत की नींव हैं। इन खनिजों के बिना, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, और रक्षा उद्योगों का विकास संभव नहीं है। NCMM के माध्यम से, भारत इन खनिजों में आत्मनिर्भर बनेगा, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास में मजबूती आएगी। Prabhasakshi
अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी और द्विपक्षीय समझौते
भारत ने जापान के साथ क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को विविधतापूर्ण बनाना और खनिजों की आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके अलावा, भारत ने अन्य देशों के साथ भी साझेदारी बढ़ाई है, ताकि वैश्विक आपूर्ति संकट से निपटा जा सके।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव
NCMM भारतीय अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव डालेगा। इससे घरेलू उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी, आयात पर निर्भरता कम होगी, और रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसके अलावा, यह भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाएगा।


