SCO सम्मेलन में भारत की प्राथमिकताएं
25वें SCO सम्मेलन, जो तिआनजिन में आयोजित किया गया, में भारत ने सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों को अपनी प्राथमिकता बताया। पीएम मोदी ने SCO डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी, आतंकवाद, आर्थिक सहयोग और टिकाऊ विकास जैसे विषयों पर जोर दिया MEA IndiaThe Economic Times। साथ ही भारत ने Pahalgam आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ डबल स्टैंडर्ड को स्वीकार करने से इनकार किया The Times of IndiaThe Economic Times।
मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात के मुख्य मुद्दे
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की SCO सम्मेलन के दौरान मुलाकात में सीमांत संघर्ष को शांति से सुलझाने और लोकतांत्रिक सहयोग पर जोर दिया गया। मोदी ने सीमा पर शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि शी ने द्विपक्षीय संबंधों को विश्वास और सम्मान आधारित आगे बढ़ाने का संदेश दिया Press Information BureauAl Jazeera। दोनों नेतृत्य़ों ने बहुपक्षवाद और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने पर सहमति जताई।
भारत-चीन सीमा विवाद पर चर्चा
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का मुद्दा SCO सम्मेलन की छाया में रहा। मोदी ने सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखने की आवश्यकता दोहराई, और दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों द्वारा गत माह शुरू की गई बातचीत को उल्लेखनीय बताया Press Information Bureau। यह संकेत था कि दोनों देशों ने संघर्ष के समाधान के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाया है।
एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका
चीन और अमेरिका के बीच बढ़ रही टकराव के बीच भारत ने SCO को एक मजबूत मंच के रूप में परिभाषित किया—जहां वह “सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर” के पुल पर अपना प्रभाव बढ़ा सके The Economic TimesMEA India। साथ ही, ट्रम्प उस समय अमेरिका के राजकोषीय नीति की आलोचना कर रहे थे, जिसकी पृष्ठभूमि में भारत का SCO में सक्रिय भागीदारी एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक संदेश रही ReutersIndia Today।
SCO में रूस और पाकिस्तान के साथ संबंध
Russia के साथ भारत के संबंध SCO के मंच पर बेहतर ढंग से उभरे। मोदी और पुतिन की गर्मजोशी SCO सम्मेलन के दौरान स्पष्ट दिखी, जिससे दोनों देशों के पारंपरिक रणनीतिक सहयोग का संदेश गया AP NewsIndia Today। वहीं, पाकिस्तान का SCO में अलगाव भी ध्यान में आया—पीएम मोदी ने आतंकवाद समर्थकों की पीठ थोपे जाने पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी की, जिससे पाकिस्तान को संदेश स्पष्ट हुआ The Times of IndiaThe Economic Times।
आर्थिक सहयोग और व्यापारिक साझेदारी
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने SCO के भीतर आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए विकास बैंक की स्थापना और $1.4 बिलियन के अनुदान प्रस्तावित दिए The TimesThe Guardian। इस दिशा में SCO परियोजनाओं जैसे BRI के विकल्पों पर भारत ने स्पष्ट रुख अपनाया, विशेषकर चाबहार और अंतरराष्ट्रीय नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के माध्यम से The Economic TimesPress Information Bureau।
आतंकवाद और सुरक्षा के मुद्दे
पीएम मोदी ने Pahalgam आतंकी हमला को SCO में आतंकवाद के खिलाफ एक साझा मिशाल के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि इसका भयावह असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है बल्कि सम्पूर्ण क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करता है The Times of IndiaThe Economic Times। साथ ही, SCO की रिजनल एंटी-टेररिस्ट स्ट्रक्चर (RATS) का भी मुद्दा उभरा, जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद को रोकने के लिए केंद्रीय तंत्र है WikipediaMEA India।
SCO सम्मेलन के भारत के लिए फायदे और चुनौतियां
SCO के माध्यम से भारत को क्षेत्रीय सहयोग का व्यापक मंच मिला—जहां वह बिना किसी पश्चिमी दबाव के अपना रुख स्पष्ट कर सकता है। यह बहुपक्षवाद की भावना को सशक्त करता है और भारत को रणनीतिक रूप से फायदेमंद साबित होता दिखा। हालांकि साथ ही चुनौतियाँ भी थीं—जैसे सीमा विवाद, आतंकवाद, पाकिस्तान के मौजूद मुद्दे, और चीन-रूस-पाक मंच पर भारत की असमंजसपूर्ण स्थिति The TimesAP News।
निष्कर्ष
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी ने भारत की रणनीतिक भूमिका को और धार दी। सम्मेलन ने सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ मजबूत रुख पर भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर खड़ा किया। हालांकि सीमा संघर्ष, क्षेत्रीय असंतुलता, और जटिल दल-विशेष रिश्तों जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। फिर भी, SCO भारत को एशिया-प्रति सामूहिक प्रभाव और नए सहयोग के अवसर प्रदान करता है—जो भविष्य में और भी निर्णायक साबित हो सकता है।


