Edited and reviewed by Geetanjali.
रूस की घटती जनसंख्या को रोकने के लिए सरकार अब शादी और बच्चे पैदा करने पर बड़े इनाम दे रही है — यहाँ तक कि कॉलेज की छात्राओं को भी। जानिए पूरी कहानी।

युद्ध नहीं, अब जनसंख्या रूस की सबसे बड़ी चिंता
रूस पिछले कुछ सालों से युद्ध, प्रतिबंधों और राजनीतिक मुद्दों के चलते सुर्खियों में रहा है। लेकिन देश के भीतर एक और गंभीर संकट चुपचाप बढ़ रहा है — तेजी से घटती जनसंख्या।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024 की पहली छमाही में सिर्फ 5.99 लाख बच्चे जन्मे, जो पिछले 25 सालों का सबसे कम आंकड़ा है। पिछले साल की तुलना में भी करीब 16,000 बच्चे कम पैदा हुए। अगर यही रफ्तार रही, तो आने वाले वर्षों में रूस की आबादी में भारी गिरावट देखने को मिलेगी।
क्यों चिंतित है रूस सरकार
युवाओं का बड़ी संख्या में युद्ध में शामिल होना, पलायन और विवाह दर में गिरावट — इन सबने मिलकर रूस को जनसंख्या संकट की तरफ धकेल दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, देश का फर्टिलिटी रेट अब 1.4 से भी नीचे चला गया है, जबकि स्थिर जनसंख्या के लिए 2.1 की दर जरूरी मानी जाती है।
सरकार का नया फार्मूला: “बेबी बोनस”
इस संकट से निपटने के लिए रूस सरकार ने कई नई योजनाएं शुरू की हैं जिनका उद्देश्य है — युवाओं को जल्दी शादी और बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करना।
इसी दिशा में अब कुछ इलाकों में एक चौंकाने वाली योजना शुरू हुई है:
अगर कोई स्कूल या कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा गर्भवती होती है, और कम से कम 22 हफ्ते की प्रेग्नेंसी पूरी कर चुकी है, तो उसे सरकार की तरफ से लगभग 1 लाख रुपये तक का नकद इनाम दिया जाएगा।
यह योजना अभी रूस के केमेरोवो, कारेलिया, ब्रायन्सक, ओरयॉल और टॉम्स्क जैसे क्षेत्रों में चल रही है।
सरकार का तर्क: “युवा पीढ़ी से ही बदलाव”
कई लोगों को यह योजना अजीब लग सकती है, लेकिन सरकार का तर्क साफ है — देश की जो “प्रजनन उम्र” वाली महिलाएं हैं (20–29 वर्ष), उनकी संख्या हर साल घट रही है। इसलिए युवाओं को शुरुआती उम्र में परिवार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
ब्रायन्स्क की एक युवा मां ने स्थानीय मीडिया को बताया,
“ये इनाम मेरे लिए सिर्फ पैसे नहीं हैं, यह सरकार की तरफ से एक संकेत है कि हमें महत्व दिया जा रहा है।”
रूस में जनसंख्या बढ़ाने की अन्य योजनाएं
रूस की यह स्टूडेंट बोनस योजना अकेली नहीं है। देश में पहले से कई तरह की कैश, हाउसिंग और अलाउंस योजनाएँ चल रही हैं।
📋 रूस की प्रमुख जनसंख्या प्रोत्साहन योजनाएँ
| योजना / क्षेत्र | पात्रता | इनाम की राशि (लगभग) |
|---|---|---|
| ब्रायन्स्क | तीसरे बच्चे के जन्म पर | ₹1.5 लाख |
| यूलयानोव्स्क | युवा माताओं के लिए | ₹2 लाख |
| चेलयाबिंस्क | बड़े परिवारों के लिए | ₹10 लाख |
| मातृत्व पूंजी योजना | दूसरे या तीसरे बच्चे पर | ₹5–6 लाख रूबल |
| स्टूडेंट प्रेग्नेंसी बोनस | स्कूल/कॉलेज छात्राएं (22 हफ्ते गर्भवती) | ₹1 लाख |
(राशियाँ क्षेत्र अनुसार बदल सकती हैं।)
घर और बच्चों के लिए सरकारी सहायता
नकद इनाम के अलावा, रूस में बच्चों वाले परिवारों को कम ब्याज दरों पर होम लोन, सब्सिडी, और कुछ जगहों पर मुफ्त जमीन तक दी जा रही है।
“फैमिली मॉर्गेज स्कीम” के तहत, दो या उससे अधिक बच्चों वाले परिवार सिर्फ 6% ब्याज दर पर घर का लोन ले सकते हैं। कुछ ग्रामीण इलाकों में नए माता-पिता को मुफ्त प्लॉट भी दिए जा रहे हैं।
साथ ही, जन्म से लेकर 18 साल तक मासिक “चाइल्ड अलाउंस” मिलता है, जो परिवार की आय के अनुसार बढ़ता या घटता है। गरीब परिवारों को इसमें प्राथमिकता दी जाती है।
मातृत्व पूंजी योजना: पुराना पर असरदार कदम
2007 में शुरू की गई रूस की “मातृत्व पूंजी योजना” आज भी देश की सबसे बड़ी सामाजिक योजनाओं में से एक है।
इसमें दूसरे या तीसरे बच्चे पर माता-पिता को लगभग 5 लाख रूबल (पहले बच्चे पर) और 1.5 लाख रूबल (दूसरे पर) तक का आर्थिक सहयोग मिलता है। यह राशि माता-पिता घर, शिक्षा या बच्चे की देखभाल पर खर्च कर सकते हैं।
क्या इतने इनाम से बदलेगी तस्वीर?
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ आर्थिक सहायता से जनसंख्या नहीं बढ़ेगी।
मॉस्को विश्वविद्यालय के समाजशास्त्री कहते हैं,
“पैसे से मातृत्व को प्रेरित नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्थिर नौकरियाँ, भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएँ और सुरक्षित भविष्य चाहिए।”
लेकिन सरकार का मानना है कि यह कदम जरूरी है — कम से कम लोग फिर से परिवार बढ़ाने पर सोचें, तो यह शुरुआत होगी।
आलोचना और समर्थन दोनों
कुछ वर्ग इस योजना को साहसिक और व्यावहारिक मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे विवादास्पद बताते हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे छात्राओं की शिक्षा बाधित हो सकती है या सामाजिक दबाव बढ़ सकता है।
वहीं समर्थकों का तर्क है कि इससे युवाओं को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और परिवारिक मूल्यों की ओर वापसी होगी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की राय
WHO के अनुसार, किसी भी देश में जन्म दर बढ़ाने के लिए सिर्फ आर्थिक प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं होते।
संगठन ने कहा है कि सरकारों को साथ में इन बातों पर भी ध्यान देना चाहिए —
- महिलाओं के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा की समान पहुँच
- सस्ती डे-केयर सुविधाएँ
- फ्लेक्सिबल जॉब नीतियाँ
- लैंगिक समानता और सामाजिक सुरक्षा
(स्रोत: WHO Maternal Health Report)
भविष्य की राह
क्या “बेबी बोनस” जैसी योजनाएँ रूस की जनसंख्या घटने की रफ्तार को धीमा कर पाएंगी? अभी कहना मुश्किल है।
लेकिन इतना तय है कि रूस ने शायद दुनिया में सबसे आक्रामक “फर्टिलिटी पॉलिसी” शुरू की है — जिसमें भावनात्मक अपील, आर्थिक प्रोत्साहन और सामाजिक संदेश — तीनों शामिल हैं।
22 साल की अलीना (कारेलिया) बताती हैं,
“मैंने सोचा था पहले पढ़ाई पूरी करूँगी, फिर परिवार बनाऊँगी। पर अब लगता है, शायद वक्त बदल गया है।”
निष्कर्ष
रूस की सरकार का संदेश साफ है — “हर जन्म मायने रखता है।”
स्टूडेंट बोनस से लेकर मातृत्व पूंजी तक, हर योजना का लक्ष्य है देश के भविष्य को बचाना।
लेकिन असली सवाल यह है कि क्या पैसे से मातृत्व खरीदी जा सकती है, या इसके लिए समाज को अपनी सोच बदलनी होगी?
एक बात तय है — रूस की आने वाली पीढ़ी उसके युद्ध नहीं, बल्कि उन lullabies (लोरियों) में तय होगी जो नई माताएँ गाएँगी।
Disclaimer:
यह लेख रूस की सरकारी रिपोर्ट्स, Reuters, और अन्य मीडिया स्रोतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है, न कि किसी नीति या विचारधारा का समर्थन करना।


